पहाड़ी किले का रहस्य (भाग 1: पुरानी डायरी)steemCreated with Sketch.

in #horrorstory25 days ago

पहाड़ी किले का रहस्य (भाग 1: पुरानी डायरी)

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मौसम बेहद खतरनाक था। बाहर तेज़ हवाएं चल रही थीं, मूसलाधार बारिश हो रही थी और बिजली की कड़कड़ाहट से कमरे की खिड़कियां थरथरा रही थीं। समीर अपने पुस्तैनी घर के स्टोररूम में बैठा पुराना सामान साफ कर रहा था। वह अपने स्वर्गीय दादाजी की चीज़ों को एक अलग लकड़ी के संदूक में रख रहा था—जिनका लगभग दस साल पहले इंतकाल हो गया था।

एक भारी लकड़ी की अलमारी को एक तरफ खिसकाते समय, समीर को उसके पीछे छिपा हुआ एक छोटा, जंग लगा लोहे का डिब्बा मिला। उस डिब्बे पर कोई नाम या निशान नहीं था। जब उसने जैसे-तैसे उसका जंग लगा ताला तोड़ा, तो अंदर एक पुरानी, चमड़े की ज़िल्द वाली डायरी मिली।

समय के साथ डायरी के पन्ने पीले पड़ चुके थे, जिन पर अजीबोगरीब नक्शे और काली स्याही से गूढ़ बातें लिखी हुई थीं। शुरुआती कुछ पन्नों में दादाजी के व्यक्तिगत नोट्स थे, लेकिन जैसे ही समीर आखिरी पन्नों तक पहुँचा, उसकी आँखें हैरानी से फटी की फटी रह गईं।

एक पन्ने पर एक सुनसान पहाड़ी की चोटी पर बने एक प्राचीन किले का स्केच बना हुआ था। उस चित्र के नीचे दादाजी की लिखावट में लिखा था:

"मर्गला की पहाड़ियों के पीछे, भूले-बिसरे रास्तों से बहुत दूर, एक ऐसा किला है जहाँ समय ठहर जाता है। जो लोग वहाँ गए, वे या तो कभी वापस नहीं लौटे, या फिर हमेशा के लिए बदल कर लौटे। मैंने वहाँ ऐसी चीज़ें देखी हैं जो इंसानी समझ से परे हैं... इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, मुझे वहाँ वापस जाना ही होगा।"

समीर की धड़कनें तेज़ हो गईं। उसके दादाजी एक मशहूर पुरातत्वविद (Archaeologist) थे, जो अपने आखिरी दिनों में अचानक रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए थे और फिर कभी नहीं मिले। क्या वे इसी किले में गए थे?

तभी समीर के दो सबसे अच्छे दोस्त—ज़ैद और अनाया—उसके घर पहुँचे। ज़ैद एक पेशेवर फोटोग्राफर था, जबकि अनाया प्राचीन भाषाओं और प्रतीकों (symbolism) की जानकार थी।

समीर ने उनके सामने खुली हुई डायरी रखते हुए कहा, "तुम दोनों इसे देखो।"

अनाया ने जैसे ही पन्ने पलटे, उसकी उंगलियां एक खास निशान पर जाकर रुक गईं। "यह प्रतीक... यह किसी जाने-पहचाने राजवंश का नहीं है। यह किसी प्राचीन गुप्त संगठन का निशान है। और यह नक्शा... यह तुम्हें किसी सामान्य मैप पर नहीं मिलेगा।"

ज़ैद ने उत्साह से मुस्कुराते हुए कहा, "तो फिर हम किसका इंतज़ार कर रहे हैं? अगर तुम्हारे दादाजी का राज़ वहाँ ऊपर छिपा है, तो हमें चलना चाहिए। मेरे कैमरे की बैट्री पूरी तरह चार्ज हैं!"

"यह खतरनाक हो सकता है," अनाया ने धीरे से चेतावनी दी। "डायरी में साफ लिखा है कि वहाँ से कोई वापस नहीं लौटा।"

समीर ने डायरी को कसकर पकड़ा और अपने दोस्तों की तरफ देखा। "मेरे दादाजी का आखिरी रहस्य उस किले में बंद है। मैं तो जा रहा हूँ, चाहे जो हो जाए। क्या तुम लोग मेरे साथ हो?"

ज़ैद और अनाया ने एक-दूसरे को देखा और सहमति में सिर हिला दिया। उन्होंने तय किया कि वे अगली सुबह तड़के ही उस रहस्यमयी किले की तलाश में निकलेंगे, इस बात से बेखबर कि वे एक ऐसी दुनिया में कदम रखने जा रहे थे जहाँ से वापसी शायद मुमकिन न हो...

मैं "भाग 2: यात्रा की शुरुआत!" (Part 2: The Journey Begins!) पढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ। आप जब चाहें अगला भाग साझा कर सकते हैं!