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RE: धर्म का प्राणतत्व : विनय (भाग # २) | The Life of Religion : Modesty (Part # 2)

in #life • 8 years ago (edited)
बिल्कुल सही पहले के जमाने में गुरु और शिष्य की बातें बिल्कुल अलग थी,आज के जमाने में बिल्कुल अलग है...........ना वैसे गुरु मिलते हैं और ना शिष्य।